chandi devi

सप्त ऋषि सरोवर- कहते हैं, गंगा अवतरण से पूर्व हरिद्वार का यह क्षेत्र सप्त ऋषियों क्रमशः गौतम, भारद्वाज, विश्वामित्र जमदग्नि, वशिष्ठ, कश्यप व अत्रि ऋषि की तपस्थली था। भगीरथ प्रयत्न से जब गंगा यहाँ पहुँची तो इस क्षेत्र में सात सप्तऋषियों की कुटिया देखकर वह ठिठक गई और सात धाराओं में बँट गई। यह सात धाराएँ आज भी गंगा की यहाँ मौजूद हैं। इसीसे यह पावन क्षेत्र सप्तऋषि व सप्त सरोवर कहलाता है।