chandi devi

ऋषिकेश- कुम्भनगरी हरिद्वार से 24 किमी दूर केदारनाथ-बदरीनाथ मोटरमार्ग पर पावन गंगा व चन्द्रभागा के संगम पर स्थित है यह प्रमुख धार्मिक स्थल। हरिद्वार से ऋषिकेश तक गंगा तट के साथ-साथ एक पैदल मार्ग भी जाता है। ऋषिकेश एक प्राचीन धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल है। गढ़वाल हिमालय के चारों धामों, पंच प्रयागों, पंच बदरी, पंच केदार, शक्तिपीठ धारी देवी, हेमकुण्ड, कालीमठ आदि की तीर्थयात्रा यहीं से होकर शुरू होती हैं
प्राचीन काल से ऋषिकेश संस्कृत, अध्यात्म व ब्रहम विद्या की भी केन्द्र स्थली रही है। उत्तर रेलवे का यह अंतिम स्टेशन है। यहाँ से लगभग 15 किमी दूरी पर जौलीग्रान्ट हवाई अड्डा है। ऋषिकेश साक्षात् देवभूमि है। यहाँ पौराणिक महत्व के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। आश्रम हैं, लक्ष्मण झूला, राम झूला यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं। लक्ष्मण झूला प्राचीनतम झूला है। इसके पास ही लक्ष्मण का प्राचीन मन्दिर व घाट भी है। प्राचीनकाल के देवप्रयाग जाने का यही एक मात्र मार्ग बताया जाता है। गंगा पर लोहे के रस्सों द्वारा निर्मित 450 फीट लम्बा यह पुल है जो चलने में डोलता है इसलिए झूला पुल कहलाता है।
ऋषिकेश के प्रमुख स्थलों मंे एक त्रिवेणी घाट भी है। यहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती का गुप्त संगम माना गया है। इसके अलावा लक्ष्मण झूला पुल के ठीक सामने विशाल 13 मंजिला कैलाश मंदिर है। यह मंदिर हिन्दू मूर्ति संग्रहालय के नाम से भी प्रसिद्ध है। इस मंदिर में समस्त देवी-देवताओं व उनके अवतारों की मूर्तियाँ स्थापित हैं।