chandi devi

बिलकेश्वर महादेव- बिल्व पर्वत की तलहटी पर इसी जगह कहते हैं, शिव प्राप्ति के लिए हिमालय पुत्री उमा ने घोर तपस्या की। इस दौरान वह सिर्फ बिल्व पत्तों का ही सेवन करती थी। बाद में उन्हें भी त्यागकर वह अर्पणा हो गई। अंत में प्रसन्न होकर शिव ने यहीं उन्हें दर्शन दिये, तभी से यहाँ बिल्केश्वर महादेव की स्थापना मानी जाती है। यहीं गौरीकुण्ड भी है। कहते हैं तपस्या में लीन उमा यानी गौरी के लिए यह कुण्ड अपने आप प्रकट हो गया था। मान्यता है यहाँ शिवधारा में स्नान से शिवत्व की प्राप्ति होती है।